![]() |
| Mother Teresa |
मदर टेरेसा ने जिन गरीबों और बेसहारों की सेवा की, उनके लिए वे जीवित संत थीं। वेटिकन में भी कई अनुयायी इससे सहमत हैं लेकिन कैथोलिक चर्च किसी को आसानी से संत की उपाधि नहीं देता। संत घोषित किए जाने की लंबी और जटिल प्रक्रिया है।
मदर टेरेसा को संत घोषित किए जाने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से रविवार को पूरी हो जाएगी जब पोप फ्रांसिस उन्हें नया संत घोषित कर देंगे। संत की उपाधि देने की प्रक्रिया की शुरुआत वहां से होती है, जहां उस महान व्यक्ति ने जीवन बिताया और जहां उसका निधन हुआ। मदर टेरेसा का जीवन कोलकाता में बीता और वहीं उनका निधन हुआ।
संत घोषित करने की प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होती है। पहले चरण में संबंधित व्यक्ति के अनुयायी स्थानीय बिशप के सामने उस शख्स की महानताओं और चमत्कारों को साबित करते हैं। फिर चर्च की ओर से चुने गए पॉस्चुलेटर के जरिये उस व्यक्ति के चमत्कारों के सबूतों और जानकारियों के आधार पर एक पत्र तैयार किया जाता है जिसके आधार पर पोप उस व्यक्ति को पूज्य की उपाधि देते हैं।
''मदर टेरेसा को संत की उपाधि दिए जाने से हर भारतीयों को गर्व होगा''
''मदर टेरेसा को संत की उपाधि दिए जाने से हर भारतीयों को गर्व होगा''
सिर्फ एक ऊँगली से उठ जाता है 70 किलो का पत्थर..
दूसरे चरण में पोप उसे धन्य घोषित करते हैं। टेरेसा को 2003 में धन्य घोषित किया गया था। आखिरी चरण में रोमन कैथोलिक चर्च के प्रमुख पोप द्वारा महान व्यक्ति को संत की उपाधि दी जाती है। संत घोषित करने की प्रक्रिया को कैनोनाइजेशन कहते हैं।
दूसरे चरण में पोप उसे धन्य घोषित करते हैं। टेरेसा को 2003 में धन्य घोषित किया गया था। आखिरी चरण में रोमन कैथोलिक चर्च के प्रमुख पोप द्वारा महान व्यक्ति को संत की उपाधि दी जाती है। संत घोषित करने की प्रक्रिया को कैनोनाइजेशन कहते हैं।
‘मदर टेरेसा गरीबों की मसीहा थीं और कमजोर तबके के लिए एक सहारा। उन्हें संत की उपाधि दिए जाने से हर भारतीयों को गर्व होगा। उन्होंने अपना पूरा जीवन गरीबों और बेसहारा लोगों की सेवा में बिता दिया। मदर टेरेसा ईश्वर के हाथ में खुद को एक छोटी सी पेंसिल के तौर पर देखती थीं और अपना काम शांतिपूर्ण तरीके से करती थीं। हमेशा उनके चेहरे पर मुस्कान रहती थी।’
- प्रणब मुखर्जी, राष्ट्रपति
- प्रणब मुखर्जी, राष्ट्रपति
